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आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा साप्ताहिक मीडिया वार्ता का प्रतिलेख (04 अप्रैल, 2024)

अप्रैल 04, 2024

श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: देवियों और सज्जनों, नमस्कार। इस प्रेस वार्ता में आप सभी का स्वागत है। मैं प्रश्न पूछने के लिए मंच खोलता हूं।

कादंबिनी: एनडीटीवी इंडिया से कादंबिनी शर्मा। ताइवान में जो भूकंप आया है उसमें क्या भारतीय लापता हैं? और अगर हैं तो कितने हैं? क्या जानकारी है विदेश मंत्रालय के पास?

सिद्धांत: नमस्ते महोदय, मैं WION से सिद्धांत हूँ। महोदय, चीन ने एक बार फिर से भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों के नाम मनमाने ढंग से बदले हैं। भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। लेकिन आप चीन द्वारा भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश पर दावा करने के इस पैटर्न को किस प्रकार देखते हैं?

प्रणय: महोदय, प्रणय उपाध्याय जी न्यूज से। मेरा सवाल इस चीज को लेकर है कि चीन के इन तमाम पैटर्न को देखते हुए, इन बयानों को देखते हुए, क्या हमने बीजिंग में भी इस मामले को उठाया है या चीनी जो मिशन चीफ हैं, उनको यहां पर समन किया था?

सुचित्रा: नमस्ते महोदय, मैं न्यूज18 तमिल से सुचित्रा हूँ। महोदय, मेरा प्रश्न कच्चाथीवू मामले के पुनः उठने को लेकर है। मेरे दो प्रश्न हैं। पहला, श्रीलंका के मंत्री जीवन थोंडामन ने टिप्पणी की कि इस मामले पर कच्चाथीवू में भारत को प्राधिकार वापसी के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं एक अन्य वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि नई सरकार की इच्छा से सीमाएं नहीं बदली जा सकती हैं। क्या इस बारे में आप कोई टिप्पणी करना चाहेंगे?

श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: कच्चाथीवू पर कोई और प्रश्न?

सुधि: महोदय, मैं ब्लूमबर्ग से सुधि रंजन हूँ। विशेष रूप से कच्चाथीवू पर, महोदय, मेरा अर्थ है कि, मंत्री जी ने अंत में ठीक ही कहा कि भारत की संप्रभुता को लेकर पिछली सरकारें बहुत लापरवाह रही हैं। पिछले 10 वर्षों में इस सरकार ने क्या किया है? और अब जब हाल ही में इसका पता चला है, तो क्या यह मामला श्रीलंका के साथ उठाया गया है या उठाया जा रहा है और किस स्तर पर?

प्रणय: RTI के जवाबों को लेकर एक विवाद है, दोनों तरफ, दोनों जवाबों को लेकर। अगर आप उस पर स्पष्ट कर सकें, विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख क्या है? दो RTI में विसंगति क्यों है?

श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: पहला सवाल कादंबिनी आपका। हम लोगों की जानकारी के हिसाब से दो लोग पहले, जो भूकंप आया ताइवान में, वहां पर दो लोगों से हम संपर्क नहीं कर पा रहे थे। लेकिन अब हम लोगों ने वहां पर उनसे संपर्क कर लिया है और वो लोग सुरक्षित हैं। तो ये जो दो लोग हमारे पहले वहां लापता थे, उसके बारे में जानकारी मैं आपसे साझा करना चाहता हूँ।

सिद्धांत, चीन के संबंध में आपके प्रश्न पर बात करें। जैसा कि आप जानते हैं, हमने इस मुद्दे पर बार-बार अपनी बात कही है। हमने पिछले कुछ सप्ताहों में कुछ वक्तव्य दिए हैं। हर बार हमने अपना दृष्टिकोण दोहराया है। इसलिए, मैं चाहूँगा कि आप हमारे वक्तव्य देखें, जो हमने कहा है, वास्तव में, कई, कुछ जो हमने दिए हैं। यह हमारी स्थिति को स्पष्ट करता है कि किसी के द्वारा कोई नाम रखने से वास्तविकता नहीं बदल सकती है। वास्तविकता तो यही है। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है, अविभाज्य अंग है और रहेगा।

प्रणय आपकी बात जो है उस पर, आपने देखा होगा कि हम लोगों ने यहां पर बाकायदा, विदेश मंत्रालय ने वक्तव्य जारी किए हैं इस पर, इस मुद्दे पर, चीन के मुद्दे पर, अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर। और मैं चाहूँगा कि आप हमारे वक्तव्यों को देखें, पैनी नजर से देखें, फिर आपको पता चलेगा कि कितनी गहराई और कितने जोर से हम लोग अपनी बात को रख रहे हैं।

अब हम सुचित्रा, सुधि, उमाशंकर और प्रणय द्वारा पूछे गए कच्चाथीवू के मामले पर आते हैं। तो, मैं आपको बताना चाहूँगा कि जो मुद्दे उठाए गए हैं, विदेश मंत्री ने यहां दिल्ली में और गुजरात में भी प्रेस से बात की है और सभी मुद्दों पर स्पष्टीकरण दिया है। मैं कहूँगा कि आप कृपया उनकी प्रेस वार्ताओं का अवलोकन करें। आपको वहां उत्तर मिल जाएंगे।

मधुरेंद्र: महोदय, मधुरेंद्र, मैं न्यूज नेशन से। मेरा सवाल इजराइल जा रहे भारतीय जो श्रमिक हैं उनके जत्थे को लेकर है, कि जब युद्ध शुरू हुआ था तो हम भारतीयों को वहां से ले कर आए, अभी युद्ध समाप्त भी नहीं हुआ है और हम वहां पर अपने श्रमिकों को काम करने के लिए भेज रहे हैं, तो क्या कोई इसके पीछे नीति में बदलाव है, और क्या इसके पीछे कारण है अगर बताना चाहें तो?

ऋषभ: महोदय, मैं टाइम्स नाउ से ऋषभ हूँ। महोदय, मैं मधुरेंद्र की बात में कुछ जोड़ना चाहता हूँ। महोदय, इजरायल के राजदूत और यहां नई दिल्ली में इजरायल के दूतावास ने X पर पोस्ट किया कि जी2जी समझौते के तहत, हम इन 60 को ले रहे हैं; इस समझौते पर कब हस्ताक्षर किये गये थे? क्योंकि विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने दिसंबर में राज्यसभा में कहा था कि इस तरह की कोई बात नहीं है जो चर्चा हो रही है। तो अब, क्या हमारे पास कोई समय-सीमा है कि इसे कैसे आगे बढ़ाया गया और समझौते पर कब हस्ताक्षर किए गए और इन लोगों को कैसे चुना गया?

आयुषी: मैं ANI से आयुषी अग्रवाल हूँ, ऋषभ ने अभी जो पूछा मेरा प्रश्न उससे जुड़ा हुआ है। क्या हमें इन श्रमिकों के सुरक्षा मापदंडों के बारे में भी विवरण मिल सकते हैं? क्या इजरायली पक्ष ने हमें कुछ आश्वासन दिया है और क्या हमारे पास उस कार्यस्थल के कोई विवरण हैं, जैसे कि उन्हें कहाँ तैनात किया जाएगा, क्या उन्हें सीमावर्ती इलाकों में भेजा जाएगा? और आपने हमारे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर मार्च में जो एडवाइजरी जारी की थी... आपने मार्च में जो एडवाइजरी जारी की थी, क्या वह अभी भी लागू है?

सुहासिनी: हिंदू से सुहासिनी हैदर। पहले पूछे गए सभी प्रश्नों पर एक स्पष्टीकरण चाहिए, विशेषकर इजराइल में कब्जे वाले इलाकों का मामला, वे बस्तियाँ जो भारत द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं हैं। क्या आपको लगता है कि इनमें से कोई श्रमिक उन इलाकों में या गाजा के आसपास के इलाकों में या वास्तव में गाजा के अंदर किसी पुनर्निर्माण कार्य के अंतर्गत काम करेगा? क्या ऐसे कोई विशिष्ट आश्वासन हैं जो भारत ने मांगे हैं या मिले हैं कि वे वास्तव में कहां तैनात होंगे? मेरा एक और प्रश्न है... अमेरिकी ट्रेजरी अधिकारी मूल्य सीमा प्रतिबंधों के दूसरे चरण के बारे में वार्ता के लिए अभी दिल्ली में हैं और वे विस्तार चाहते हैं... वास्तव में जिन्हें वे प्रतिबंध प्रभावित करेंगे। अमेरिकी तेल मूल्य सीमा पर भारत का दृष्टिकोण क्या है और इन बैठकों के दौरान आप भारत की ओर से क्या संदेश दिया जाना अपेक्षित करते हैं?

संजय: यूके के उपप्रधानमंत्री ने चीन पर आरोप लगाया है कि उसने ब्रिटेन के चुनाव आयोग को हैक किया, और चीन इसके पहले भारत में भी कई साइबर हमलों में शामिल रहा है। भारत में आम चुनाव होने जा रहे हैं। आपकी टिप्पणी क्या है? क्या आपको लगता है कि चीन उस प्रकार का कुछ कर सकता है?

श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: मधुरेंद्र, आपका सवाल इजराइल को लेकर है, जैसा कि आप जानते हैं कि इजराइल में हमारे बहुत सारे नागरिक वहां पर कार्यरत हैं, करीबन 18,000 लोग हमारे खास कर देखभालकर्ता वहां कार्यरत हैं। हमारा जो वहां पर दूतावास है वो उनसे लगातार संपर्क में है, उनकी देखभाल के लिए, उनकी सुरक्षा के लिए, और वो हमारे लिए एक अहम मुद्दा है।

आपके द्वारा पूछे गए अन्य प्रश्नों के मामले में, जैसा कि आयुषी और अन्य ने पूछा था, जी2जी समझौते के तहत व्यक्तियों का पहला समूह इजराइल गया है। हमारे लिए उनकी सुरक्षा बेशक बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी सुरक्षा और उनके कल्याण का ख्याल रखने की पूरी कोशिश करने के लिए हमने इजरायली अधिकारियों से आग्रह किया है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस मामले में मुझे यही कहना है। आयुषी, आपने हमारे सभी भारतीय नागरिकों के बारे में एडवाइजरी, परामर्शियों के बारे में भी बात की जो वहां हैं, और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक हैं जो इजराइल में मौजूद हैं।

सुहासिनी, आपने विशिष्ट आश्वासनों से जुड़े प्रश्न पूछे हैं, हमने इजरायली अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे हमारे लोगों की सुरक्षा को बहुत गंभीरता से लें और इस संबंध में जो भी आवश्यक हो वह सारी कार्यवाही करें।

सुहासिनी: मेरा प्रश्न संप्रभुता के मामले पर था, महोदय, यह जानना था कि क्या वे किन्हीं रिहायशी इलाकों में, या ऐसे इलाकों में कार्य करेंगे जिन्हें भारत द्वारा इजराइल के भाग के रूप में मान्यता नहीं दी गई है?

श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: नहीं, वे इजराइल जा रहे हैं। देखिए, ये निर्माण श्रमिक हैं। जैसा कि आपको पता हैं कि निर्माण कार्य कहां होता है। निर्माण कार्य ऐसे इलाकों में हो रहा है जहां अपेक्षाकृत आर्थिक गतिविधियां वगैरह हो रही हैं। निश्चित रूप से, यह विचार करना महत्वपूर्ण हैं।

आपने मूल्य सीमा के बारे में भी पूछा था। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव यहां दिल्ली में हैं। हमारे लिए, ऊर्जा सुरक्षा, तेल खरीद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारी खरीदारी से संबंधित सारी बातें, ये सभी बातें हमारी ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकता के आधार पर होती हैं और यह एक वाणिज्यिक प्रक्रिया भी है जो हम करते हैं। यह एक वाणिज्यिक उपक्रम है जिससे हम जुड़े हैं। हम अंतरराष्ट्रीय बाजार से सबसे सस्ती दर पर तेल खरीदते हैं जहां भी यह उपलब्ध होता है, क्योंकि हमें ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करनी है और यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।

संजय, आपका प्रश्न साइबर सुरक्षा को लेकर था। साइबर सुरक्षा के मामले हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। हमारे यहां बड़ी जनसंख्या है। डिजिटल दुनिया से जुड़े भारतीयों की संख्या काफी बड़ी है। हम डिजिटल दुनिया में बहुत सारी सेवाएं शुरू कर रहे हैं। जैसा कि आप डिजिटल इंडिया के बारे में जानते हैं, आप उन सभी सेवाओं के बारे में जानते हैं जो हम प्रदान कर रहे हैं। इसलिए, इस कारण से, साइबर सुरक्षा बहुत महत्व का विषय है। ऐसे मामले ए से, बी से, सी से कहीं से भी उत्पन्न हों, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ये पटना से हों या और कहीं से, हमारे लिए सभी समान रूप से महत्त्वपूर्ण हैं, साइबर सुरक्षा सर्वोपरि है। हम अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए हरसंभव आवश्यक उपाय करेंगे।

सुधि: महोदय सुधि रंजन, मुझे दूसरा प्रश्न पूछने का मौका देने के लिए धन्यवाद, महोदय। महोदय, सीरिया में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर इजरायल द्वारा किए गए हमले पर क्या कोई टिप्पणी है?

श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: सुधि, देखिए, उस विशेष मामले में, 1 अप्रैल, 2024 को सीरिया में ईरानी राजनयिक परिसर पर हमले पर हमने चिंता व्यक्त की है। भारत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर, तथा आगामी समय में हिंसा और अस्थिरता के और अधिक बढ़ने की आशंका को लेकर चिंतित है। हम सभी पक्षों से ऐसी गतिविधियों से बचने का आग्रह करते हैं जो सामान्य स्वीकृत सिद्धांतों, और अंतरराष्ट्रीय कानून के मानदंडों के खिलाफ हों। तो यह हमारा दृष्टिकोण है, आपने जो कहा उस पर यह हमारा वक्तव्य है, हमले को लेकर हमारी प्रतिक्रिया है।

शुभज्योति: मैं बीबीसी न्यूज से शुभज्योति हूँ। बांग्लादेश में, तथाकथित इंडिया आउट अभियान, जिसके अंतर्गत मुख्य रूप से भारतीय उत्पादों का बहिष्कार किया जा रहा है, चल रहा है और यह जोर पकड़ रहा है। और कुछ प्रमुख विपक्षी नेताओं ने भी इसे अपना समर्थन दिया है। तो क्या आप उस बारे में कोई टिप्पणी करना चाहेंगे? और दूसरी बात, यह कि क्या इस मामले से, भारत द्वारा बांग्लादेश को किए जाने वाले निर्यातों की मात्रा पर कोई प्रभाव पड़ रहा है?

उर्वशी: महोदय, हालाँकि आपने कच्चाथीवू मुद्दे के संबंध में विदेश मंत्री की प्रेस वार्ताओं को देखने के लिए कहा, कुछ चीजें उनकी प्रेस वार्ताओं के बाद उजागर हुई और सामने आईं, जैसे कि 2015 और 2024 के बीच RTI विसंगतियां। इसलिए यदि आप विशेष रूप से… यदि आप विसंगति पर प्रकाश डाल सकें, यह पहली बात है; और दूसरा यह कि श्रीलंका के नेताओं द्वारा दिए जा रहे वक्तव्यों पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है। मैं न्यू इंडियन से उर्वशी हूँ।

इलियाना: शुभ मध्याह्न। TASS न्यूज एजेंसी से इलियाना। भारत और मेरा देश रूस, आतंकवाद के विरूद्ध संघर्ष में लंबे समय से करीबी सहयोगी बने रहे हैं। और जैसा कि हम जानते हैं, दुर्भाग्य से, हाल ही में, मॉस्को क्षेत्र में एक कॉन्सर्ट हॉल पर हमला हुआ, बहुत दुखद घटना, जिसकी बर्बरता को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। भारत के प्रधानमंत्री ने भी संवेदनाएँ प्रेषित कीं। तो, आतंकवाद के विरूद्ध संघर्ष में भारत-रूस संबंधों को देखते हुए, क्या इस आतंकवादी हमले की जांच को लेकर दोनों पक्षों के बीच कोई संपर्क हुआ है? क्या भारत ने इस मुद्दे पर रूसी पक्ष के साथ कोई डेटा या जानकारी साझा की है? धन्यवाद।

कल्लोल: द हिंदू से कल्लोल। कच्चाथीवू पर उर्वशी के प्रश्न से जुड़ा मेरा एक प्रश्न है। आमतौर पर हम देखते हैं कि ऐसे राजनयिक मुद्दे और द्विपक्षीय राजनयिक संधियाँ, जब भी ये उठाई जाती हैं, तो ये इस मंच से उठाई जाती हैं, जिस पर आप बैठे हैं, या शायद विदेश मंत्री द्वारा विदेश मंत्रालय परिसर से उठाई जाती हैं। मैंने पहले भी कई अवसरों पर ऐसा देखा है। वास्तव में किस बात ने विदेश मंत्री को पार्टी के मंच से यह मुद्दा उठाने के लिए प्रेरित किया? इसीलिए मैं यह जानने को उत्सुक हूँ कि क्या आप वास्तव में... यह कहने के कूटनीतिक निहितार्थों को मैं समझता हूँ, पिछले कुछ दिनों में जो कुछ भी हुआ है, लेकिन क्या यह वास्तव में एक राजनीतिक मुद्दा है या यह एक कूटनीतिक-कूटनीतिक मुद्दा है? क्योंकि मैं वास्तव में यहाँ इस मामले की व्यापकता को देख रहा हूँ, महोदय।

सिद्धांत: महोदय, हाल ही में हमने पाकिस्तानी विदेश मंत्री की टिप्पणियाँ देखीं जिनमें कहा गया था कि भारत के साथ व्यापार के मामले में, वे इस पर विचार कर सकते हैं। भारत पाकिस्तानी विदेश मंत्री की उन टिप्पणियों को कैसे देखता है?

श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: ठीक है। आपके प्रश्न के संबंध में मुझे यह कहना है कि भारत-बांग्लादेश के बीच संबंध बहुत प्रगाढ़ और गहन रहे हैं। हमारे बीच साझेदारी बहुत व्यापक रही है जो अर्थव्यवस्था से लेकर व्यापार, निवेश से लेकर विकास सहयोग, संपर्क, व्यक्तियों से व्यक्तियों तक, सभी क्षेत्रों तक फैली हुई है। हर तरह के मानवीय प्रयासों के आयाम; भारत-बांग्लादेश संबंधों का लगभग अभिन्न अंग रहे है। यह साझेदारी बहुत ही जीवंत है और आगे भी ऐसी ही बनी रहेगी।

उर्वशी, कच्चाथीवू को लेकर आपका एक प्रश्न था। मैं फिर से कहना चाहूँगा कि कृपया कुछ समय निकालें और विदेश मंत्री ने यहां दिल्ली में और गुजरात में अपनी प्रेस वार्ताओं में जो कुछ कहा था उसे देखिए, जिसमें कच्चाथीवू पर आपके द्वारा उठाए गए सभी प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे। इसलिए मैं आपसे आग्रह करूंगा कि कृपया उन प्रेस वार्ताओं का संदर्भ लीजिए। आप जो स्पष्टीकरण चाहती हैं उससे आप संतुष्ट होंगी।

इलियाना, आपके प्रश्न के संबंध में, हां, हमारे प्रधानमंत्री ने हमले की निंदा की थी और कई अन्य लोगों ने भी ऐसा किया था। यह एक भयावह हमला था और हमारी आपके प्रति गहरी संवेदना है। जैसा कि आपको पता है, कि भारत-रूस के बीच साझेदारी एक रणनीतिक साझेदारी है। हम कई क्षेत्रों में मिलकर एक साथ कार्य करते हैं, आतंकवाद और सुरक्षा, रक्षा, यह भारत और रूस के बीच सहयोग का एक समान रूप से महत्वपूर्ण स्तंभ है और हम इनके साथ सभी अन्य क्षेत्रों में भी अपने संबंध अधिक मजबूत बनाना चाहते हैं।

कल्लोल, आपके प्रश्न के संबंध में, मैं आपको विदेश मंत्री की प्रेस वार्ता का संदर्भ लेने के लिए कहना चाहूँगा, इसलिए मैं इस बारे में और कुछ नहीं कहना चाहता।

सिद्धांत, आपके प्रश्न के संबंध में बात करें तो, हाँ, हमने कुछ रिपोर्ट देखी हैं। हमने विदेश मंत्री की टिप्पणियों के बारे में कुछ रिपोर्ट देखीं, लेकिन फिर आपको पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता द्वारा की गई टिप्पणियां देखनी चाहिए। कृपया उन टिप्पणियों पर एक नजर डालें। आप देखेंगे कि दोनों के बीच विरोधाभास है। तो इस मामले में अभी केवल यही कहा जा सकता है।

अभिषेक: मैं सीएनएन न्यूज 18 से अभिषेक झा हूँ। पाकिस्तान में, हाल ही में पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर, पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने अपने भाषण में कहा कि हम अतीत की छाया से बाहर निकल सकते हैं और अपने दोनों देशों के नागरिकों के लिए एक नया भविष्य बना सकते हैं; और यह भी कि सभी लंबित मुद्दों को आपसी सम्मान के साथ हल किया जा सकता है, जिसमें जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भी शामिल है। आप उस वक्तव्य को कैसे देखते हैं और उस पर आपकी क्या टिप्पणी है?

श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: तो अभिषेक, उस पर, हम निश्चित रूप से वही मानेंगे जो पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है। इसलिए मैं आपसे फिर आग्रह करूंगा कि उन्होंने जो वक्तव्य दिया है उसे ध्यान से देखें। हम इस मुद्दे को इसी प्रकार देख रहे हैं।

आयुषी: महोदय, ANI से आयुषी अग्रवाल। मैं मालदीव के बारे में नई जानकारी चाहती हूँ, क्योंकि राष्ट्रपति ने फिर कहा है कि दूसरे प्लेटफॉर्म पर तैनात भारतीय सैनिक इसी महीने वापस जाएंगे। इस पर क्या नई जानकारी है, और अगली टीम के कब तक वहां पहुंचने की उम्मीद है, जैसा कि हमने पिछली बार शायद मार्च में भेजा था?

श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: तो जैसा कि आप जानते हैं, हम आपको अब तक हुई सभी उच्च स्तरीय कोर ग्रुप बैठकों से अवगत कराते रहे हैं। हमने आपको बताया था कि वहां मौजूद भारतीय कर्मियों के पहले बैच को बदलने के लिए निर्णय लिया गया है। जब इस मामले में हमारे पास कोई और नई जानकारी होगी तो हम आपको उससे अवगत कराएंगे।

पिया: मैं प्रिंट से पिया हूँ। महोदय, मैं बस यह स्पष्टीकरण चाहती थी कि आपने कहा था कि जो भारतीय श्रमिक इजराइल जा रहे हैं, वे संघर्ष से पूर्व सरकार से सरकार के बीच हुए समझौते के अंतर्गत हैं। आप उस समझौते के बारे में बात कर रहे हैं जिस पर मई 2023 में हस्ताक्षर किए गए थे जब इजराइल के विदेश मंत्री आए थे। बस इस मामले में स्पष्टीकरण चाहिए।

श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: मुझे नहीं पता कि आप आप किसका जिक्र कर रही हैं, लेकिन मैंने यह बात अपनी पिछली प्रेस वार्ताओं में भी कही है। हमारा जो समझौता है, जी2जी समझौता, यह संघर्ष से पहले का है।

उर्वशी: महोदय, दोहा मामले के संबंध में एक नई जानकारी, अंतिम व्यक्ति जो अभी भी वहां है, उनकी कब तक भारत वापसी होनी अपेक्षित है?

श्री रणधीर जायसवाल, आधिकारिक प्रवक्ता: उर्वशी, मैं आपको अन्य प्रेस वार्ताओं का संदर्भ लेने को कहना चाहूँगा जो हमने की थीं। उनमें मैंने इस मुद्दे को स्पष्ट कर दिया था कि...उन्हें कुछ विशेष अपेक्षाएं पूरी करनी हैं, जेसे ही वे अपेक्षाएं पूरी हो जाएंगी तो फिर वे वापस आ जाएंगे।

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। अपना ध्यान रखें।

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